लडके के लिये लाडकी ढूंढने
निकले गांव, गांव, गली, गली –
क्या करू अबतक वो न मिली
दुल्हनिया, अब इंतजार और न कराना,
जल्दी आना, जल्दी मिलना
अपना घर सुखी करना

सौ. उषा प्रभुणे
उदगीर, भारत
एप्रिल २००२

© २००२ सौ. उषा अरुण प्रभुणे
© 2002 Usha Arun Prabhune

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